मंगलवार, 11 मई 2021

डॉ शास्त्री जी हमेशा हमारे मार्गदर्शक की तरह हमारे विचारों के पीछे खड़े रहेंगे।

डॉ. शास्त्री जी हमेशा हमारे मार्गदर्शक की तरह हमारे विचारों के पीछे खड़े रहेंगे।


हमारा और हम सबका दायित्व है की हम उनके विचारों को प्रकाशित करें अभी फेसबुक से कुछ आलेख लेकर यहां लगा रहे हैं  - डॉ लाल रत्नाकर 


मोदी सरकार केवल पूंजीपतियों और सवर्णों के हित में काम करती है। तीनों कृषि कानून पूंजीपतियों के फायदे के लिये हैं।लेटरल एंट्री से भर्ती और आर्थिक आधार पर आरक्षण सवर्णहित में हैं। वर्षों से लंबित भर्तियों में भी आर्थिक आधार पर आरक्षण सरासर बेईमानी है।

घर में सुख- हमृद्ध के लिये कम ,दुर्घटनाओंके लिये अधिक जिम्मेदार औरतो को माना जात है और सजा भी दी जाती है‌।मुझे एक ऐसी औरत की जानकारी दी गई,जिसका पति उसके गौना( शादी के बाद ससुराल के लिये प्रथम विदाई) आने के बाद मर गया।वह विधवा ही नहीं हुई ससुराल भी छूट गई।उसके पिता ने उसकी दूसरी शादी कर दी।संयोग से‌ दूसरा पति भी मर गया।अब वह विधवा और पति को खाने‌वाली मान ली गई।उसको इसकी सजा मिली। उसे एक कोठरी में बंद कर दिया‌ गया और तरह- तरह की यातनायें भी उसे दी गई।भूख- प्रयास और यातना से तंग उसका उसी कोठरी में प्राणांत हो गया।
ऐसी होती हैं औरत के बारे में अवैज्ञानिक मान्यतायें और दूभर हो जाता है उनके लिये जिंदगी गुजारना।

लगता है हिन्दू कहलाने और उपेक्षा में लात खाने को कुछ यादव भी संघी बन गये हैं और कुछ बन रहे हैं,प्याज छीलने।


फेसबुक पर अपने विचार व्यक्त करना,सुझाव देना और उनसे यह उम्मीद करना कि लोग पढ़कर कोई परिवर्तन कर सकेंगे तो निराशा ही हाथ लगेगी।

शून्य होते आरक्षण से विचलित नहीं हैं अंधभक्त ओबीसी/ एससी और एसटी के लोग,ताली - थाली- शंख बजाने में हैं मगन।

२६ ,मई,२०१४ से ही व्यक्ति की आय कम होने लगी,लेकिन पूंजीपतियों की आय में बढ़त होती चली गई। किस तरह की अर्थव्यवस्था चला रहे हैं मोई (मोदी) जी?

आत्मनिर्भर भारत का एक मतलब है प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर लौटना।
कितना नीरस लगता है
बिना कुछ किये घर में
अकेले बैठे रहना
सुबह उठे
बाउंड्री के भीतर
पेड़ की सूखी ,गिरी
पत्तियां बुहारी
आधा घंटा घूमे
चाय पी चुके थे
घूमकर शौच गये
हाथ धुले,ब्रश किये
इंसुलिन निकाल कर
लगाने के समय का
इंतजार किया
समाचार पढ़ते हुये
मन में आते,चलते
विचार टंकित किये
स्मार्टफोन पर
इंसुलिन सिरिंज में
उदर में लगा
आधा घंटा बेसब्री से
नाश्ते के आने की
मधुर प्रतीक्षा की
डायटीशियन के निर्देश का
पालन करते हुये
दो रोटी और सब्जी
पेट में ठूंस लिया
फिर एक कप दूध ले
नौ बजे तक का समय
यों ही गुज़ार दिया
न कहीं आना
न कहीं जाना
बैठे- बैठे
फेसबुक चलाना
यह भी कोई जीवन है।

डॉ मनराज शास्त्री
2 अप्रैल 2021
( आगे की करनी फिर)।।

भारतीय समाज में संत- महात्मा आदर और विश्वास के पात्र माने जाते हैं और वे प्राय: लंबे बाल और लंबी दाढ़ी रखते हैं,झूठ बोलने वाले नहीं माने जाते भले ही वे ऐसा करें,छलें।रावण भी साधुवेष में ही सीता के पास आया था,ऐसा राम कथा में है,हनूमान भी ब्राह्मणवेष/ साधुवेष में जंगल में भटकते रामलक्ष्मण को मिलने गया था सुग्रीव के आदेश पर।इसीलिये मोदी भी संतवेष में छल करते घूम रहे हैं।अब देखना है कि जनता इस कपटमुनि कालनेमि पर कितना विश्वास करती है।

प० बंगाल में आठ चरण में चुनाव का रहस्य मोदी के प्रचार की सुगमता है।चुनाव आयोग भी गजब है,बगल की सीट पर वोट पड़ रहे हैं और सटी हुई सीट पर प्रचार,लूटो न वोट बालदाढ़ी बढ़ा कर।

एक थी निर्भया
और एक थी मनीषा
कितना फर्क होता है
सवर्ण और दलित की
सुंदर,सलोनी बेटी होने में
अलग- अलग होते हैं
सुख -दु: ख,दर्द और खुशी के
समाज द्वारा गढ़े गये मानक
लालन- पालन और घटनायें
एक सी होने पर भी लोगों की
प्रतिक्रियायें जुदा- जुदा होती हैं
निर्भयास़ंग होती है दरिंदगी
गुप्तांग में उसके शैतानों ने
घुसेड़ दीं लोहे की राड
चीखी,चिल्लाई छोड़ने बचाने की
पुरजोर की गुजारिश और कोशिश
लेकिन हैवानियत रुकी नहीं
फेंक दी गई लावारिस,साथी चोटिल
खबर छपी अखबारों में
सारा भारत विचलित,विगलित हो गया
शहर दर शहर कैंडिल जला कर प्रदर्शन हुये
उत्तर से दक्षिण,पूरब से पश्चिम
संस्कृति के रखवालों का शोर
सरकार पर निशाना,शैतानों पर चीत्कार
फांसी दो,फांसी दो की चतुर्दिक ललकार
उसके दर्द की अनुभूति हर दिल हर ओर
संवेदना,सहृदयता का गगनभेदी स्वर
भारत से सिंगापुर तक
उसको बचाने की कोशिश
क्या कुछ नहीं किया,पर रहे नाकाम
ऐसी ही हृदयविदारक घटना घटी
हाथरस में सफाईकर्मी की बेटी संग
नाम था मनीषा,अल्हड़ जवान थी शायद
सवर्ण युवकों की आंखें लगी थीं उस पर
हुआ जोर जुल्म उसके साथ
अंग प्रत्यंग तोड़े गये,राड़ का भी प्रयोग
परिजन रोते,गिड़गिड़ाते
लेकिन थाने में रिपोर्ट तुरत लिखी नहीं
अलीगढ़ में बेमन से अस्पताल में
पुलिस प्रशासन ने भर्ती कराया
बहुत से तथ्य छिपाये गये
न अखबार,न संस्कृतिरक्षक न कै़डिल मार्च
कोई चुप तो कोई शांत ,कोई हलचल नहीं
अपराधियों को बचाने की पूरी कोशिश
परिजन दोषी ठहराये जाने‌ लगे
आनर किलिंग का मामला बनाया जाने‌ लगा
आखिर अस्पताल में हालत बिगड़ने‌ लगी
उसे दिल्ली भेजा गया पर‌ वह न बची
उसका शव घर लाया गया
पर घरवालों को नहीं दिखाया गया
रात के अंधेरे में उसको जलाया गया
न पिता ने‌ देखा,न माता ने ,न भाई ने
तरह- तरह के दबाव,धमकियां आने लगीं
गुनहगारों की जातीय पंचायतें होने लगीं
सभी सवर्णों में मच गई खलबली
मूंछों की इज्जत बलबलाने‌ लगी
प्रदेश के मुखिया बहुत तमतमाये
तुरत जांच कमेटी बनायें और उलझाये
एसआईटी से सीबीआई तक जांच कर चुके
परिणाम आजतक कुछ मालूम नहीं
बेटियां बेटियां हैं मगर
जातियां ऐसा मानती नहीं
कोई बेटी है इज्जत मां- बाप की
कोई बेटी खिलौना है बडी जाति की
देखिये आप अपनी आंखें खोल कर
पैदा इसी देश में हुई निर्भया
मनीषा भी पैदा इसी देश में।

डॉ मनराज शास्त्री
1 अप्रैल 2021

मोई जी! (मोदी जी) एक ममता दी को हराने के लिये केन्द्र और भाजपा शासित‌ राज्यसरकारें दिन-रात हाथ धोकर पड़ी हैं और डर रहीं हैं वे,असल डर तो आपको है।

योगी सरकार का सवर्णवर्चस्ववादी फैसला।१,फरवरी,२०१९ तक दो से चार वर्ष से लंबित भर्ती वाली जो परीक्षायें/ साक्षात्कार आयोजित न हो सकीं,उनमें भी आर्थिक आधार पर ईडब्ल्यूएस के लिये अधिकतम१०% आरक्षण दिया जाय।१०% आरक्षण १८फरवरी,२०१९ को जारी शासनादेश से लागू था।शासनादेश के तहत१,फरवरी२०१९ या इसके बाद की अधिसूचित/ विज्ञाफित रिक्तियों पर लागू होना‌ था।इस शासनादेश को अधिनियम का हिस्सा मानकर अधिनियम की धारा १३ में यह व्यवस्था उनरिक्तियों पर भी‌ प्रभावी कर दी गईं जो १ ,फरवरी,२०१९ से पूर्व विज्ञापित कर दी गईं थीं।लेकिन उनकी परीक्षाइस तिथि के बाद आयोजित की गईं या की जानी प्रस्तावित हैं।परस्पर विरोधी प्रावधान के कारण भर्तीयां लंबित रहीं,परीक्षा/ साक्षात्कार नहीं आयोजित हुये। अब हो रहा है।
आरक्षित वर्ग‌ के राजनेता/ कार्यकर्त्ता,सामाजिक संगठन/ सामाजिक कार्यकर्त्ता, जातीय संगठन/नेता,विधायक/ सांसद,केन्द्र/ राज्य स्तरीय मंत्रु इस मुद्दे पर मौन हैं।
अब जब २०२२ में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है,वोट की फसल काटने के लिये सवर्णों को खुश किया जा रहा है और आरक्षित वर्ग को भी नौकरी पाने का लालच दिया जा रहा है,झुनझुना बजाने को बहुत है.



सरेआम चौराहे पर गोली चलती
घायल‌ होते ,मरते
बच्चे,बूढ़े या नौजवान‌
पेंशन लेकर लौट रहा
जुलजुल मास्टर बैंक के भीतर
लुट जाता है चोर उचक्कों से
नकदी - गहनों संग पिटता लुटता
सोने- चांदी का व्यापारी
जान गवां देता है
पान बेचने वाला
मांग लिया अगर उधारी
हाल यही होता है
मीट और चाय विक्रेता का
करता बात अगर संस्कारी
पिटता रिक्शे वाला बीच सड़क
मांग लिया यदि किराया भारी
दादा घूम रहे हर गली मुहल्ले
करती पुलिस उनकी मनुहारी
खेत और खलिहानों में,
होटल,रेस्ट्रा ,मैदानों मे
धानों और दुकानों में
चल रही समांतर सरकारें
कानून दबंगों के हाथों में
लेकिन उदित हो रहा उत्तम प्रदेश
योगी के फरमानों और बयानों में
गुंडाराज खत्म हो गया
सवर्णों की निगाहों में।
बीच सड़क लुट रहा दुपट्टा
घर से बाहर विद्यालय जाती
छात्राओं का,निरीह बालाओं का
घर में सोती अबलाओंऔर युवतियों का
मनबढ़ करते निर्द्वंद भाव से हरण
रेप और गैंगरेप कर उन्हें मारते/ जलाते
दोषी को बचाने जाति की शान में
निकलते लंबे जुलूस होती पंचायत
पीड़िता होती बदनाम अगर बच गई
घर की इज्ज़त नीलाम,होती निपट अकेली
निडर घूमाता मिलता आरोपी
जाने कितनी मनीषाओं के परिजन
दर- दर फिरते न्याय मांगते
खत्म नहीं होती
शासन न्यायालय की जांचे
झुलसा रहीं उनको तानों की आंचे
संगीत बज रहा शक्तिमिशन का चहुं ओर
जातिवाद के अंत का हो रहा बहुत ही शोर।

डॉ मनराज शास्त्री
2 अप्रैल 2021







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