गतिविधियां

गतिविधियां :

दिनांक ; 25 मार्च 2021 ;

कल का दिन जौनपुर शहर और डा० लाल रत्नाकर के घर बिशुनपुर में बीता। पहले लाल पैथालाजी गया और सुगर तथा किडनी संबंधी जांच के लिये ब्लड सैम्पुल दिया। फिर डा० रत्नाकर के घर गया। डा० साहब के मित्र श्री शाहिद अख्तर अमेठी से आनेवाले थे। चिंटू( नीरज) उनको लेने बादशाहपुर रेलवे स्टेशन रजनीश के साथ गये। इसी बीच डा० साहब ने दोपहर में खाने के लिये खिचड़ी बनाने के उपक्रम में लग गये। साथ ही मिस्त्रियों के साथ मिलकर लालरंग बुद्ध की ध्यानमुद्रा में बैठी मूर्ति के निर्माण को अंतिम रूप देने में भी लगे रहे। खिचड़ी पकती‌ रही,मूर्त्ति भी बनती रही। इसी बीच चिंटु शाहिद भाई को लेकर आ गये। खिचड़ी पक चुकी थी। खाने के लिये परसी गई और हम चार लोग- मैं,शाहिद भाई,डा० साहब और चिंटू- सुस्वादु खिचड़ी का सानंद सेवन करने में लग गये। इसी समय यह सूचना मिली कि नवोदित कवि और समाजसेवी श्री कमलेश यादव गोमती ग्रामीण बैंक के सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक,जौनपुर सांसद श्री श्याम सिंह यादव के प्रतिनिधि श्री रमाकांत यादव के साथ पधार रहे हैं। लिहाजा उन्हें भी भी खिचड़ी भोज में शामिल कर लिया जाय- यह निर्णय भी लिया गया। लोगों किन उनके लिखे खिचड़ी रख कर हम लोग उसके साथ न्याय करते रहे और समाप्ति से पहले वे लोग भी आ गये तथा भोजन में शामिल हो गये।

भोजनोपरान्त हम लोग कुछ सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करने लगे। कमलेश ने एक ज्वलंत प्रश्न उछाल दिया कि बुद्ध से लेकर डा० अंबेडकर तक इतने महापुरुष आते और उन्होंने मनुवाद/ ब्राहृमणवाद का विरोध किया,अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया, परंतु आज भी समाज में उसका प्रभाव बना हुआ है।सवाल बहुत ही सामयिक है। इस पर चर्चा होती रही,इसी प्रसंग में इस्लाम का जिक्र आया। शाहिद भाई ने इस्लाम में खिलाफत के संबंध में अ्च्छी जानकारी दी। क्रम से अली तक के चार खलीफाओं के चयन की प्रक्रिया से अवगत कराया। म्वाविया और उसके बेटे यजीद के संबंध में भी सटीक जानकारी दी। चर्चा जारी रही और कमलेश के प्रश्न पर अभी भी बहस की गुंजाइश है। चर्चा अधूरी रही। अगली किसी बैठक में इसकी पड़ताल होगी। बैठक के डा० रत्नाकर द्वारा सामाजिक परिवर्तन पर समय- समय पर आयोजित की जाने वाली गोष्ठियों के लिये किये जा रहे हाल और उसकी सजावट में लार्ड बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं वाली मूर्तियों का निरीक्षण भी किया गया। इसके बाद मैं चिंटू के साथ घर वापस आ गया और शेष लोग रुके रहे।

इस तरह कल का दिन बीत गया। 

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