जीवन परिचय

जीवन परिचय  


सामाजिक न्याय के सजग प्रहरी और बहुजन समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक नेता का असमय चला जाना।
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डॉ. मनराज शास्त्री जी का जन्म 01 जुलाई 1941 को जौनपुर जनपद के बटाऊबीर के पास सराय गुंजा गांव में हुआ । इनका निधन वाराणसी में एक प्राइवेट अस्पताल के icu में दिनांक 16 अप्रैल 2021 को शाम 5:00 बजे हो गया।
इनकी आरंभिक शिक्षा दीक्षा पास के प्राइमरी स्कूल से शुरू होकर सल्तनत बहादुर इंटर कॉलेज से इंटर तक की शिक्षा हुई इसके उपरांत इन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय गये और वहीं से इन्होंने संस्कृत विषय में एम ए और पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।

तदुपरांत यह राजकीय महाविद्यालय की सेवा में इसलिए आ गए कि विश्वविद्यालयों में उस समय भी तमाम नियुक्तियों को लेकर के काबिलियत की वजाय अन्य बहुत सारे कारण, कारण बन जाते थे।
राजकीय महाविद्यालय से जब शाहगंज डिग्री कॉलेज के लिए प्रिंसिपल की पोस्ट विज्ञापित हुई तो उसके लिए इन्होंने विज्ञापन भरा और इनका चयन हो गया लम्बे समय तक इन्होंने गन्ना कृषक महाविद्यालय ताखा, शाहगंज में प्रिंसपल के रूप में कार्य किये।
ज्ञातव्य है कि शास्त्री जी जब विद्यार्थी थे तभी से यह सामाजिक विचारधारा को लेकर के बहुत सशक्त समझ रखते थे। आने वाले दिनों में चौधरी चरण जैसे किसान नेता के संपर्क में आए और उनके सिद्धांतों को इन्होंने अपने जीवन में उतारने का प्रयास किया। इसी समय वह श्री रामस्वरूप वर्मा के संपर्क में आए। बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा के संपर्क में आए। इन सब के संपर्क में आने की वजह से वह अर्जक संघ के प्रचारक के रूप में भी कार्य करने लगे। संस्कृत के विद्वान होने के नाते वह समस्त संस्कृत साहित्य और वेदादि के विषय में इनकी जानकारी के अनुसार समाज में जिस पाखंड अंधविश्वास और चमत्कार को फैलाया गया है वह किसी भी तरह से वैज्ञानिक नहीं है और न ही किसी तरह से प्रमाणित ही है। इन्होने अपने साथी श्री रामआश्चर्य यादव के साथ परम्परागत विवाह पद्धति के खिलाफ आंदोलन खड़ा किये और वह अर्जक पद्धति से तमाम शादी विवाह संपन्न कराए।
लंबे समय तक अखिल भारतीय यादव महासभा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रहे और समाज के लिए बहुत बड़ा काम समाज में परम्परागत पाखण्ड अन्धविश्वास और चमत्कार के खिलाफ जागरूकता फैलाकर समाज के लोगों को जागरूक करने का प्रयास किये।
सेवा निवृत्ति के उपरांत वह निरंतर शिक्षा के प्रचार प्रसार में लगे रहे और सांस्कृतिक साम्राज्यवाद के खिलाफ अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग ही नहीं करते रहे बल्कि उस अवधारणा के केंद्र में उनकी विचारधारा पूरे देश में चल रहे आंदोलन में आगे बढ़कर हिस्सेदारी करते रहे।

दिनांक 16 अप्रैल 2021को एकाएक वह है करोना की चपेट से बच नहीं पाए और सायं 5:00 बजे उनका देहावसान हो गया।
पिछले दिनों फरवरी माह में उनकी श्रीमति जी का निधन हो गया तब से वह उनकी कमी महसूस करते रहे, अपने पीछे एक पुत्र श्री राजेश कुमार यादव बहू श्रीमती सीमा यादव और तीन पोतिया छोड़ गए हैं।

दो बड़ी बेटियां जिनमें दुलारी और मुकुल जिनका अपना खुशहाल परिवार है उनका नाती नीरज जो उनके साथ हमेशा रहा जिसको घर के नाम से चिंटू कहते हैं और एक तरह से समाज ही उनका पूरा परिवार था अपने भाइयों के बच्चे जो गांव में रहते हैं सब उनसे जुड़े हुए थे।
विद्यार्थी जीवन से ही छात्र राजनीति में समाजवादी विचारधारा के प्रबल समर्थक के रूप में शोषित और दलितों और पिछड़ों के हितों के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे और शिक्षा के क्षेत्र में उनको आगे आने की हमेशा बात करते रहे।
राष्ट्रीय स्तर पर इस समाज का सुधार कैसे हो उसके लिए बहुत सारे संगठनों में वह समय-समय पर अपना सुझाव देते रहे पिछले दिनों गुजरात जाकर के मनानी साहब की आने वाली किताब का पूरा स्वरूप तैयार करने का जो काम उन्होंने किया था वह पुस्तक भी मन्नानी साहब के आकस्मिक निधन की वजह से नहीं आ पाई।
माननीय मुलायम सिंह यादव जब राजनीति में शुरुआत कर रहे थे तो उन दिनों यह सारे लोग इलाहाबाद विश्वविद्यालय और शिक्षा जगत में समाजवादी आंदोलन को गति दे रहे थे जिससे माननीय मुलायम सिंह जी की विचारधारा के समर्थक होने के साथ-साथ उनके राजनीतिक आंदोलन में अनेकों तरह से सहयोग किए।

हालांकि इनके बहुत सारे साथी सपा सरकार के विभिन्न पदों पर विराजमान रहे लेकिन इन्होंने कभी भी किसी पद को हासिल करने की इच्छा जाहिर नहीं की और वह निरंतर निरपेक्ष भाव से समाजवादी आंदोलन के हिमायती बने रहे यहां तक की जब से श्री अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं तो उनके कामों की प्रशंसा और उसके प्रचार-प्रसार की हमेशा बात करते रहते रहे हैं, श्री अखिलेश यादव से भविष्य की राजनीति की उन्हें बहुत बड़ी उम्मीद रही है उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उनकी उम्मीद फलीभूत होगी।
यद्यपि राजनीतिक रूप से उन्होंने लंबे समय से किसी खास दल के प्रति वह लगाव नहीं था । लेकिन भाजपा के प्रति उनका बहुत बड़ा प्रतिकार था और वह निरंतर इस बात से बहुजन समाज को समझाने की कोशिश करते रहते थे कि यह दल और इसका मूलभूत संगठन बहुजन समाज के विनाश का बहुत बड़ा जहर अपने अंदर पाले हुए हैं।
अब जिसका प्रभाव निरंतर दिखाई भी दे रहा है लेकिन बहुजन समाज के भक्त संप्रदाय के लोगों से निरंतर वह अपनी बात कहते रहे और अंतिम समय तक वह यह बात मानते रहे जब तक यह बहुजन भक्त भाजपा नहीं त्यागेंगे तब तक उनका उद्धार नहीं होना है।

आपका चला जाना पूरे समाज के लिए एक बहुत बड़ा गैप हो गया है जिसे पूरा करना बहुत मुश्किल काम है आप का त्याग आपकी समझ आपका ज्ञान और आपकी वैज्ञानिक सोच से समाज लंबे समय तक वंचित रहेगा।
विनम्र श्रद्धांजलि सहित।
साभार

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श्री चन्द्र भूषण सिंह यादव की पोस्ट से ;
स्तब्धकारी सूचना-
16 अप्रैल 2021 निधन-सामाजिक न्याय के अनन्यतम प्रहरी डॉ मनराज शास्त्री जी नही रहे......
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शिक्षाविद,सामाजिक न्याय के अनन्यतम प्रहरी,"यादव शक्ति" पत्रिका के व्यवस्थापक मण्डल के मार्गदर्शक, उत्तरप्रदेश यादव महासभा के लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रह चुके एवं वीपीएसएस के जन्मदाताओं में से एक डॉ मनराज शास्त्री जी के निधन की बेहद स्तब्धकारी सूचना प्राप्त हुई है।
मैं डॉ मनराज शास्त्री जी को अपना आदर्श,प्रेरणास्रोतव व अपने विचारधारा का मजबूत स्तम्भ मानता रहा हूँ।उनकी मृत्यु ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया है।अभी कुछ ही दिनों पूर्व शास्त्री जी की पत्नी का निधन हुआ था जिसके बाद उन्होंने सारे पाखण्ड आदि का परित्याग कर जौनपुर जनपद के शाहगंज स्थित अपने आवास पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया था।शास्त्री जी ने किसी तरह के मनुवादी टोटकों को करने की बजाय अपने पत्नी का चित्र रख बिना मृत्युभोज किये श्रद्धांजलि सभा कर एक नई राह समाज को दिखाई थी।
डॉ मनराज शास्त्री जी "यादव" पत्रिका के सम्पादक व यादव महासभा के संस्थापक रहे "यादव गांधी" राजित बाबू के अति निकटस्थ लोगों में से एक थे।लम्बी अवधि तक यादव महासभा का प्रदेश अध्यक्ष रहते हुये डॉ मनराज शास्त्री जी ने पिछड़े समाज को जगाने व उन्हें एक जुट करने में महती भूमिका निभाई थी।चौधरी चरण सिंह जी से लेकर मुलायम सिंह यादव जी तक के अति निकट रहे डॉ मनराज शास्त्री जी का यूं चले जाना अत्यंत दुखदायी है।
1989-90 के दौर में मैं डॉ मनराज शास्त्री जी जुड़ा था जब मण्डल आंदोलन अपने शबाब पर था।मण्डल आंदोलन के बाद सामाजिक जागृति के अभियान में हम डॉ मनराज शास्त्री जी के साथ हो गए थे और उन्हें मेरे क्रियाकलापों से इतनी न प्रसन्नता होती थी कि वे अक्सर कह दिया करते थे कि चन्द्रभूषण के आ जाने से मैं निश्चिंत हूँ कि हम लोगो के कारवां को ये आगे ले जाने मे कोई कोताही नही बरतेंगे। दिल्ली,लखनऊ,आगरा,हैदराबाद,नांदेड़,पटना सहित देश भर के विभिन्न तरह की वैचारिक गोष्ठियों में डॉ मनराज शास्त्री जी का उद्बोधन प्रेरणादायी तो "यादव शक्ति" में आपका लेखन मनुवाद पर अति मारक होता था।"यादव शक्ति" पत्रिका के तेवर व कलेवर को सजाने-संवारने में डॉ मनराज शास्त्री जी के योगदान को भुलाया नही जा सकता है।
संस्कृत से पीएचडी डॉ मनराज शास्त्री जी ताखा डिग्री कालेज के प्रिंसिपल रहे व जौनपुर जनपद में सामाजिक न्याय,सेक्युलरिज्म,रुढ़िवादी संस्कारो,वंचितों के सामाजिक उन्नयन आदि के लिए जीवन पर्यंत संघर्षरत रहे।मुझे जब से आदरणीय शास्त्री जी के निधन की सूचना मिली है मैं स्तब्ध हूँ,निःशब्द हूँ क्योंकि वे मेरे मन-मस्तिष्क में बसते थे।मृत्यु सबकी होनी है,यह अटल सत्य है जिसे स्वीकार करते हुये हम सबको दुनिया में अपने ऐसे प्रियजनों के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना होगा,यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।डॉ मनराज शास्त्री जी के निधन पर मैं हृदय की गहराइयों से शोक जताते हुये उनके वैचारिक कारवां को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हुये श्रद्धासुमन समर्पित करता हूँ।
-चंद्रभूषण सिंह यादव


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श्रद्धेय डॉ.मनराज यादव शास्त्री
संक्षिप्त जीवन परिचय - राममूर्ति यादव 'अज्ञ' (प्रांतीय अध्यक्ष)

स जातो येन जातेन जातिवंश: समुन्नितम् ।
परिवर्तीनि संसारे मृत: को वा न जायते।।

अर्थात जन्म लेना उसका सार्थक है जिसके जन्म लेने से उसके समाज, जाती एवं वंश की उन्नति हो अन्यथा इस संसार में कौन पैदा नहीं होता और कौन मरता नहीं है।

उपरोक्त उक्ति को सार्थक करने वाले प्रतिभा के धनी विद्वान समाज में अग्रगण्य डॉक्टर साहब का जन्म 1 जुलाई 1941 को जौनपुर जनपद के सराय गुंजा गांव में हुआ था। आपके पिता स्वर्गीय राम सुंदर यादव साधारण किसान थे माताजी स्वर्गीय गुजराती देवी सरल स्वभाव की थी। आपने प्राइमरी पाठशाला शाहपुर से प्राथमिक एवं घनश्यामपुर के मिडिल स्कूल से 1955 में कक्षा 8 की परीक्षा उत्तीर्ण किया। सल्तनत बहादुर इंटर कॉलेज बदलापुर जौनपुर से 1957 में हाईस्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया और उत्तर प्रदेश में 10 वीं पोजीशन प्राप्त किया। इसी विद्यालय से 1959 में प्रथम श्रेणी में इंटर परीक्षा उत्तीर्ण किया। आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1961 में b.a. और 1963 में प्रथम श्रेणी में संस्कृत में m.a. की उपाधि प्राप्त किया। आपने 1969 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी फिल की उपाधि ग्रहण करने के पश्चात हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से जर्मन प्रोफिसिएटिंग सर्टिफिकेट प्राप्त किया। आपने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से प्रथमा पूर्व मध्यमा मध्यमा विशारद आधुनिक शास्त्री एवं साहित्याचार्य की उपाधियां प्रथम श्रेणी में प्राप्त किया। इन्हीं दिनों संस्कृत प्राकृत की पांडुलिपियों का परिचयात्मक ग्रंथ लिखा गया जिसमें आप सहायक संपादक रहे यह पुस्तक पब्लिक लाइब्रेरी इलाहाबाद में अध्ययनार्थ रखी हुई है।

आप अगस्त 1966 से अप्रैल 1967 तक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा विभाग में जर्मन भाषा के अंशकालिक प्रवक्ता रहे। इसके बाद 20 जून 1970 से दिसंबर 1973 तक काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ज्ञानपुर में प्रवक्ता पद पर कार्य किये। इसके बाद आप अल्मोड़ा नैनीताल चले गये। वहां अल्मोड़ा राजकीय महाविद्यालय अल्मोड़ा में प्राचार्य के पद पर कार्य किए और आपका समायोजन कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल में हो गया आपने 1 नवंबर 1984 में गन्ना कृषक महाविद्यालय ताखा शाहगंज जौनपुर की प्राचार्य पद का कार्यभार ग्रहण किया और पद की जिम्मेदारियों को सकुशल निभाते हुए 30 जून 2001 को सेवानिवृत्त हो गये।

अध्ययन करते हुए आप सितंबर 1965 में श्रद्धेय बाबूराम यादव तथा महर्षि कृष्ण विद्यावती स्मारक इंटर कॉलेज के प्राचार्य स्वर्गीय शालिकराम यादव के संपर्क में आए और यादव महासभा के सामाजिक सुधार संबंधी कार्यों में भाग लेने लगे। आपकी योग्यता एवं क्षमता को देखते हुए उत्तर प्रदेशीय यादव महासभा के उन्नाव सम्मेलन में 1990 में आपको प्रांतीय अध्यक्ष चुना गया और 2001 तक आपने इस पद का बखूबी निर्वहन किया। उन दिनों मोबाइल फोन नहीं थे लेकिन आपने व्यस्ततम समय में भी आप पत्र लिखकर पूरे प्रदेश के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से सदैव संपर्क बनाए रखे थे।

डॉ साहब ने संस्कृत साहित्य, हिंदू धर्म शास्त्रों एवं सामाजिक विचार को के मतों का गहन अध्ययन किया है। धर्म ग्रंथों में वर्णित विषमता वर्ण व्यवस्था, ऊंच-नीच का भेदभाव, पाखंड, ब्राह्मणवाद, तंत्र-मंत्र, पुनर्जन्म एवं भाग्यवाद का आपने पैनी दृष्टि से आकलन किया है और इसे दूर करके समतामूलक समाज की स्थापना हेतु अद्यतन संघर्षरत हैं। आप सदैव वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित विचारों में विश्वास करते हैं और प्रदर्शन की भावना से सदैव दूर रहकर पिछड़ों, दलितों, शोषितों एवं वंचितों के उत्थान में सारा जीवन लगा रहे हैं।

वर्तमान में आपको वीर बहादुर सिंह विश्वविद्यालय जौनपुर में आईएएस और पीसीएस निशुल्क कोचिंग के कोऑर्डिनेटर (समन्वयक) पद की जिम्मेदारी दी गई है। आप भारतीय पिछड़ा वर्ग शोषित संगठन और उत्तर प्रदेशीय यादव महासभा में संरक्षक रहते हुए समाज उत्थान हेतु प्रयासरत हैं। आपके व्यक्तित्व को निम्नांकित पंक्तियों द्वारा चित्रित किया गया है-

विद्वत जन में अग्रगण्य, है उच्च कोटि का चिंतन।
आकर्षक व्यक्तित्व संजोये, सदा प्रफुल्लित तन-मन।।
ब्राह्मणवाद मिटाने खातिर, निशि दिन रहते चिन्तित।
सामाजिक उत्थान हेतु, निज जीवन किया समर्पित।।

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डॉ शास्त्री जी हमेशा हमारे मार्गदर्शक की तरह हमारे विचारों के पीछे खड़े रहेंगे।

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